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विशेष संवाददाता, रांची
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया ₹1,58,560 करोड़ का बजट चमक-धमक वाले आंकड़ों और लोकलुभावन घोषणाओं से भरा तो है, लेकिन इसकी गहराई में झांकने पर राज्य की अर्थव्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर उभरती है। ‘अबुआ दिशोम बजट’ के नाम पर पेश किए गए इस दस्तावेज में वित्तीय अनुशासन की स्पष्ट कमी दिख रही है, जो भविष्य में झारखंड को गहरे कर्ज के जाल में धकेल सकता है।
पूंजीगत व्यय की अनदेखी, कैसे सुधरेगा इंफ्रास्ट्रक्चर?
बजट का सबसे कमजोर पहलू पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) है। कुल बजट का लगभग 76% हिस्सा (₹1,20,851 करोड़) केवल राजस्व व्यय यानी वेतन, पेंशन और पुरानी योजनाओं के संचालन में खर्च हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि जब तक बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, बिजली और उद्योगों पर निवेश नहीं बढ़ेगा, तब तक राज्य में स्थायी रोजगार का सृजन होना नामुमकिन है।
‘मंईयां सम्मान’ बनाम राजकोषीय घाटा
सरकार ने ‘मंईयां सम्मान योजना’ के लिए ₹14,065 करोड़ का भारी-भरकम प्रावधान तो कर दिया, लेकिन यह पैसा आएगा कहां से? ₹13,595 करोड़ का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) यह संकेत दे रहा है कि सरकार इन लोकलुभावन योजनाओं को चलाने के लिए बाजार से मोटा कर्ज लेगी। विशेषज्ञों की मानें तो प्रति व्यक्ति कर्ज का बोझ बढ़ने से आने वाली पीढ़ियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
बजट के पांच ‘पॉइंट: जो जनता को खटक रहे हैं
* मध्यम वर्ग को ठेंगा: महंगाई की मार झेल रहे मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए बजट में किसी राहत का जिक्र नहीं है। न तो शहरी सुविधाओं के विस्तार पर जोर है और न ही करों में कोई रियायत।
* रोजगार का रोडमैप गायब: 10% विकास दर का दावा तो किया गया है, लेकिन निजी निवेश को आकर्षित करने या नए स्टार्टअप्स के लिए कोई ठोस नीति बजट भाषण में नजर नहीं आई।
* सिंचाई और कोल्ड स्टोरेज पर चुप्पी: कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद किसानों के लिए सिंचाई की पुरानी परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय केवल छोटी राशि वाली नई योजनाओं की घोषणा कर खानापूर्ति की गई है।
* शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाली: नए कॉलेजों और अस्पतालों की घोषणा तो हुई है, लेकिन वर्तमान संस्थानों में शिक्षकों और डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने की कोई समय सीमा तय नहीं की गई।
* बढ़ता वित्तीय जोखिम: राज्य की जीडीपी का 2.18% घाटा संतुलित दिख सकता है, लेकिन यदि राजस्व संग्रह (Revenue Collection) लक्ष्य से कम रहा, तो राज्य की वित्तीय स्थिति चरमरा सकती है।
विपक्ष का प्रहार: ‘यह भविष्य बेचने वाला बजट’
विपक्ष ने इस बजट को ‘चुनावी लॉलीपॉप’ करार दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार ने केवल वोट बैंक साधने के लिए खजाने का मुंह खोला है, जबकि धरातल पर विकास की योजनाएं दम तोड़ रही हैं। युवाओं और बेरोजगारों के हाथ इस बजट से एक बार फिर खाली ही रहे हैं।