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भारतीय ज्ञान परंपरा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषयक छह दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का हुआ समापन

चतरा। संवाददाता
विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग एवं अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में महिला महाविद्यालय, चतरा में आयोजित छह दिवसीय “समता केंद्रित उच्च शिक्षा : भारतीय ज्ञान परंपरा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समेकन” विषयक संकाय विकास कार्यक्रम का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति प्रो. डॉ. चन्द्रभूषण शर्मा तथा अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं आचार्य विनोबा भावे के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनीष दयाल, चतरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार झा तथा महिला महाविद्यालय, चतरा के प्राचार्य डॉ. बलदेव राम ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया। मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. चन्द्रभूषण शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1986 में कंप्यूटर के आगमन के बाद भारतीय विद्यार्थियों ने तकनीकी क्षेत्र में विश्वभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारतीय ज्ञान परंपरा की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक स्वरूप संवाद और सहभागिता पर आधारित है। उन्होंने एक साथ एक लाख छात्राओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण देने की योजना की जानकारी भी दी। साथ ही बताया कि इस कार्यक्रम में सहभागी विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों से 50 शिक्षकों का चयन कर उन्हें द्वितीय चरण के प्रशिक्षण हेतु वाराणसी भेजा जाएगा। अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में सात महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा दिशा देती है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता देती है, समता उद्देश्य की प्राप्ति कराती है, अनुसंधान समाधान प्रदान करता है, सुशासन विश्वास उत्पन्न करता है, नेतृत्व साहस प्रदान करता है तथा शिक्षण जीवन को अर्थ देता है। विश्वविद्यालय संयोजक डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने कार्यक्रम की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आत्मसात कर ऐसी पीढ़ी तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जो राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके।
जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं मॉडल महाविद्यालय, चतरा के प्रभारी प्राचार्य डॉ. मनीष दयाल ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि चतरा जैसे शैक्षणिक रूप से पिछड़े जिले में इस प्रकार का आयोजन शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया, ताकि अधिकाधिक छात्र-छात्राएं लाभान्वित हो सकें। कार्यक्रम में चतरा जिले के विभिन्न महाविद्यालयों से 50 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में महिला महाविद्यालय के कर्मचारी तीरथनाथ रजक, तैयब अली, नीतिश कुमार, प्रिंस कुमार प्रकाश साह सहित अन्य कर्मियों तथा मॉडल महाविद्यालय, चतरा के शशि मित्तल एवं अंकज सिन्हा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। :::

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