देश में आंतरिक खतरों से निपटने की दिशा में बड़ी कार्रवाई की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आंतरिक सुरक्षा के हिसाब से कई बिंदुओं पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। गृह मंत्रालय ने झारखंड के सभी जिलों में पाकिस्तान, बांग्लादेश या चीन से जुड़े वैसे लोगों के विषय में जानकारी मांगी है, जो उनके प्रति सहानुभूति रखते हैं या एजेंट की भूमिका में हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा कुल नौ बिंदुओं पर राज्य से जानकारी मांगी गई है।
इन बिंदुओं पर जानकारी मांगी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वैसे लोगों की सूची मांगी है जो पाकिस्तान के समर्थक हों या एजेंट हों। साथ ही विदेशों में रहने वाले ऐसे चीनी लोगों की सूची तैयार करने को कहा गया है, जो भारत के विरोधी हों। बांग्लादेश के समर्थक मुस्लिम या गैर मुस्लिम और तिब्बत मूल के ऐसे लोगों की सूची तैयार करनी है, जो भारत के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। नेपाल के निवासी या नेपाल के वैसे निवासी जो यहां रहते हों व जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हों, उनकी भी सूची तैयार कर जानकारी मांगी गई है। राज्य में थानावार नक्सलियों व उग्रवादी समूह से जुड़े संदिग्धों, मददगारों की भी सूची तैयार की जा रही है।
यूनिवन वार बुक किया जा रहा अपडेट
आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से देशभर में आईबी के द्वारा यूनियन वार बुक तैयार किया जा रहा है। इससे पूर्व आईबी ने राज्य पुलिस से राज्यभर के प्रतिबंधित स्थलों की सूची मांगी थी। राज्य पुलिस के द्वारा प्रतिबंधित स्थलों की पूरी सूची अबतक केंद्र को उपलब्ध नहीं कराई गई है।
आतंकी गतिविधियों को लेकर संवेदनशील रहा है राज्य
झारखंड आतंकी गतिविधियों के लिहाज से काफी संवेदनशील रहा है। पूर्व में एनआईए की जांच में आतंकियों की गहरी पैठ का खुलासा हो चुका है। सिमी के आतंकी भटकल बंधुओं ने राज्य में अलग-अलग स्लीपर सेल तैयार किया था। 2008 के बाद से स्लीपर सेल राज्य में सक्रिय रहा था। 2013 में पटना में गांधी मैदान व बोधगया ब्लास्ट को रांची के आतंकियों ने ही अंजाम दिया था। संताल परगना के इलाके में अंसार-उल-बांग्ला समेत अन्य आतंकी संगठनों के संदिग्ध चिन्हित किए जा चुके हैं। बिहार के बांका में हुए एक बम विस्फोट के मामले में देवघर जिले के सारठ का कनेक्शन सामने आ चुका है। तकरीबन 117 संदिग़्ध पहले से एटीएस के भी रडार पर रहे हैं।