दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में कथित तौर पर पनीर के रूप में बेचे जा रहे एनालॉग उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने एक कानून छात्रा रिधिमा सिंह और वकील एपी सिद्धार्थ द्वारा दायर याचिका पर केंद्र, एफएसएसएआई और दिल्ली सरकार से छह सप्ताह में जवाब मांगा।
एनालॉग पनीर पनीर की तरह दिखने, महसूस करने और कार्य करने के लिए बनाया गया उत्पाद है, लेकिन इसमें कुछ या सभी दूध घटकों को दूध से प्राप्त नहीं होने वाली सामग्री से बदल दिया जाता है।
पिछले महीने, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने गैर-दूध घटकों से बने पनीर के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध का प्रस्ताव दिया था। 24 सितंबर को प्रकाशित मसौदा संशोधन में उन पदार्थों की सूची में “दूध से प्राप्त नहीं किए गए घटकों से बने पनीर” को जोड़ने का प्रयास किया गया है जिनकी बिक्री निषिद्ध है।
जिन उत्पादों को पहले से ही “एनालॉग इन डेयरी कॉन्टेक्स्ट” के रूप में लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत किया गया है, उन्हें अपने नाम, लेबलिंग और मार्केटिंग से “पनीर” शब्द हटाना होगा।
इस बीच, उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी याचिका में, दोनों याचिकाकर्ताओं ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे विभिन्न राज्यों में खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों ने एफएसएसएआई अधिनियम के तहत एनालॉग/गैर डेयरी पनीर के संबंध में पहले से ही निवारक और प्रवर्तन उपाय किए हैं और इस प्रकार, ऐसी कार्रवाई दिल्ली में भी की जानी चाहिए।
याचिका में कहा गया है, “दिल्ली को उपरोक्त नियामक चिंता से बाहर नहीं माना जा सकता है। दिल्ली का एनसीटी दूध उत्पादों, पनीर और पनीर आधारित भोजन तैयार करने के सबसे बड़े बाजारों में से एक है और इसमें रेस्तरां, होटल, कैटरर्स, क्लाउड किचन, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और खाद्य-वितरण प्रतिष्ठानों का एक विशाल नेटवर्क है।”
सिंह की याचिका में खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा इस तरह के निर्माण पर रोक लगाने का आदेश देने की भी मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि पनीर विशाल वर्गों में प्रोटीन के सबसे व्यापक रूप से उपभोग किए जाने वाले स्रोतों में से एक है, और उपभोक्ताओं का एक ऐसा खाद्य पदार्थ प्राप्त करने का अधिकार जो वास्तव में मांग की गई प्रकृति, पदार्थ और गुणवत्ता के अनुरूप है, अनुच्छेद 21 के तहत निहित स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार के साथ जुड़ा हुआ है।
दिल्ली सरकार के स्थायी वकील समीर वशिष्ठ ने कहा कि सरकार एनालॉग पनीर की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और जैसे ही ऐसे मामले उसके संज्ञान में आए, उसने कार्रवाई की।








